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Google ने अपनी नई ब्लॉग पोस्ट में कहा है कि क्वांटम कंप्यूटर्स न सिर्फ भविष्य की खोजों को आसान बनाएँगे, बल्कि आज के एन्क्रिप्शन सिस्टम को तोड़कर संवेदनशील डेटा तक पहुंचने की क्षमता भी रखेंगे।
इसका मतलब है कि आज हम जो पासवर्ड, प्राइवेट चैट्स, बैंक डेटा आदि सुरक्षित मानते हैं, वो भविष्य में खतरे में पड़ सकते हैं।
क्लासिकल कंप्यूटरों के मुकाबले क्वांटम कंप्यूटर्स अलग तरह से काम करते हैं—वे एक साथ कई संभावनाओं को प्रोसेस कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि आज उपयोग में लाई जा रही एन्क्रिप्शन तकनीकें (जैसे RSA) भविष्य में आसानी से तोड़ी जा सकती हैं।
Google का कहना है कि: बड़ा-पैमाने पर क्वांटम कंप्यूटर आने तक समय है, लेकिन दुश्मन पहले से एन्क्रिप्टेड डाटा को स्टोर करके भविष्य में डिक्रिप्ट करने की तैयारी कर रहे हैं।
इसीलिए सही नाम इसके लिए “store now, decrypt later” (अब स्टोर करो, बाद में डिक्रिप्ट करो) है।
Google के अनुसार यह कोई ऐसा समय नहीं है जब हमें घबड़ाना चाहिए, बल्कि यह तैयारी की घड़ी है।
क्वांटम कंप्यूटिंग के शोध में हुए प्रगति से यह साफ है कि अब यह समस्या सिर्फ दूर भविष्य की बात नहीं है—यह वास्तविक और सामने आने वाली चुनौती है।
Google और साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स कहते हैं:
PQC नए एन्क्रिप्शन तकनीक हैं जो क्वांटम कंप्यूटर के हमलों का मुकाबला कर सकती हैं।
PQC स्टैण्डर्ड्स (मानक) को 2024 में NIST ने मंज़ूर किया है, जिससे दुनिया भर के सिस्टम को सुरक्षित किया जा सकता है।
Google खुद 2016 से PQC टेस्टिंग और इम्प्लिमेंटेशन पर काम कर रहा है।
निम्न पांच मुख्य सुझाव Google ने दिए हैं:
समाज स्तर पर तैयारी बढ़ाएँ – केवल सरकारी नेटवर्क ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में भी तैयार रहें।
AI सिस्टम में PQC अपनाएँ – भविष्य की एआई प्रणालियाँ भी क्वांटम-सुरक्षित होनी चाहिए।
वैश्विक मानकों का पालन करें – अलग-अलग समाधान न अपनाएँ, जिससे सुरक्षा कमजोर न पड़े।
क्लाउड-फर्स्ट रणनीति अपनाएँ – क्लाउड सिक्योरिटी से अपडेटेड प्रोटेक्टिव लेयर मिलता है।
तकनीकी विशेषज्ञों से बातचीत जारी रखें – जब तक विशेषज्ञों की सलाह नहीं ली जाती, तैयार रहना मुश्किल है।
Google साफ कहता है कि क्वांटम कंप्यूटिंग के लाभ और जोखिम दोनों हैं। यदि हम समय रहते क्रिप्टोग्राफी को बदल देंगे, तो यह नई तकनीक मानवता के लिए फायदे का स्रोत बनेगी—वरना इसे सुरक्षा का बड़ा संकट भी कहा जा सकता है।
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