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यह डेटा सेंटर सिर्फ सर्वर रखने का स्थान नहीं होगा बल्कि Mega-scale कंप्यूटिंग और AI प्रोसेसिंग के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे Meta की भविष्य की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जरूरतों को पूरा किया जा सके।
यह डेटा सेंटर लगभग 1,500 एकड़ (≈607 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला होगा और 1 गीगावाट (1 GW) की क्षमता पर कार्य करेगा — जो बिजली की उस मात्रा के बराबर है जो कई शहरों को ऊर्जा दे सकता है।
कुल 13 भवन होंगे, जिनमें से 10 विशेष डेटा सेंटर होंगे, और बाकी लॉजिस्टिक्स, नेटवर्क व सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए उपयोग होंगे।
निर्माण के दौरान लगभग 4,000 से अधिक नौकरियाँ (जॉब्स) बनेंगी और ऑपरेशनल स्टेज पर भी करीब 300 स्थायी नौकरियाँ उपलब्ध होंगी।
Meta ने सिर्फ इमारतें बनाने का प्लान नहीं किया है — कंपनी ने यह भी कहा है कि वह:
डेटा सेंटर के ऊर्जा उपयोग का 100% हिस्सा रिन्यूएबल (सौर, पवन इत्यादि) से पूरा करेगी।
पानी का उपयोग करते समय क्लोज़्ड-लूप सिस्टम इस्तेमाल होगा, जिससे पानी की बर्बादी कम होगी।
जो पानी इस्तेमाल होगा, उसे स्थानीय जल स्रोतों में वापस जोड़ा जाएगा, जिससे पर्यावरण की रक्षा हो सके।
आसपास के किसानों और समुदाय के विकास के लिए प्रोजेक्ट में मिलकर योजनाएँ भी बनाई गई हैं।
Meta Artificial Intelligence के लिए हर दिन अधिक कंप्यूटिंग क्षमता चाहती है। ऐसे बड़े डेटा सेंटर के जरिए यह कंपनी:
AI मॉडल को तेज़ी से ट्रेन कर सकेगी।
अपने मंच (फेसबुक, इंस्टाग्राम, WhatsApp) पर बेहतर अनुभव दे सकेगी।
Metaverse जैसी उभरती तकनीकों के लिए कॉम्प्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी।
इस डेटा सेंटर से न सिर्फ Meta की टेक्नोलॉजी क्षमता बढ़ेगी, बल्कि इंडियाना राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
Meta का अनुमान है कि यह डेटा सेंटर 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक पूरी तरह से चालू हो सकता है।
यह प्रोजेक्ट कम्पनी के वैश्विक नेटवर्क के विस्तार की एक बड़ी कड़ी है, जो अगली पीढ़ी के टेक्नोलॉजी समाधान तैयार करेगा।
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